Myanmar Diplomacy: म्यांमार में सेना ने साल 2021 में आंग सान सू की की सरकार का तख्तापलट कर दिया था. इसके बाद आंग सान सू की के नेतृत्व वाली चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार के कई बड़े नेताओं को हिरासत में ले लिया गया. सैन्य प्रमुख जनरल मिन आंग ह्लाइंग ने सत्ता संभालने के बाद खुद को देश का राष्ट्रपति घोषित कर दिया. अब मिन आंग ह्लाइंग लगातार अपनी सरकार को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें इसमें पूरी तरह से सफलता नहीं मिली है. इसी कड़ी में जनरल ह्लाइंग गुरुवार को आधिकारिक दौरे पर थाईलैंड पहुंचे. यह दौरा उनके लिए क्षेत्रीय समर्थन और राजनीतिक मान्यता हासिल करने की कोशिशों में एक अहम कदम साबित हो सकता है.
म्यांमार भी लोकतंत्र की राह पर निकल पड़ा
राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग अपने कैबिनेट सदस्यों के साथ दो दिवसीय दौरे पर थाईलैंड पहुंचे हैं. इस दौरान उन्होंने सरकारी आवास पर थाईलैंड के प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की. बैठक के दौरान कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनमें म्यांमार के प्रवासी मजदूरों से जुड़े मुद्दे, दोनों देशों की साझा नदियों में जल गुणवत्ता प्रबंधन और पृथ्वी की निगरानी के लिए अंतरिक्ष तकनीक से संबंधित समझौते शामिल हैं. प्रधानमंत्री अनुतिन के साथ बैठक में मिन आंग ह्लाइंग ने थाईलैंड को यह भरोसा दिलाने की कोशिश की कि उनकी सरकार देश में स्थिरता बहाल कर रही है और म्यांमार को लोकतंत्र की दिशा में आगे ले जा रही है. उन्होंने कहा कि म्यांमार ने लोकतंत्र की राह पर खुद को फिर से स्थापित कर लिया है और अब बेहतर भविष्य की ओर बढ़ रहा है. मिन आंग ह्लाइंग ने कहा कि नई सरकार के तौर पर हमने राष्ट्रीय स्थिरता, शांति और राष्ट्रीय सुलह की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है. हालांकि, इस दौरे की ‘जस्टिस फॉर म्यांमार’ जैसे एक्टिविस्ट समूहों ने आलोचना की है. संगठन का कहना है कि इस यात्रा से मिन आंग ह्लाइंग और म्यांमार के सत्ताधारी सैन्य जनरलों को ‘गलत वैधता’ मिलती है.

फिर से रिश्ते स्थापित करना चाहता है म्यांमार
मिन आंग ह्लाइंग ने अप्रैल में राजनीतिक रूप से खुद को फिर से स्थापित करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया. दिसंबर और जनवरी में हुए चुनावों के बाद उन्होंने राष्ट्रपति पद की शपथ ली. हालांकि, आलोचकों ने इन चुनावों को महज दिखावा करार दिया. उनका कहना था कि ये चुनाव सेना की सत्ता पर पकड़ को मजबूत करने के लिए कराए गए थे, जबकि इसके जरिए केवल नागरिक शासन बहाल करने का दिखावा किया गया. यह राजनयिक पहल उस प्रयास का हिस्सा है, जिसके तहत म्यांमार क्षेत्रीय देशों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ अपने संबंधों को फिर से बेहतर बनाने की कोशिश कर रहा है. फरवरी 2021 में सेना प्रमुख रहते हुए मिन आंग ह्लाइंग ने आंग सान सू की की निर्वाचित सरकार को सत्ता से हटा दिया था, जिसके बाद कई देशों के साथ म्यांमार के रिश्ते तनावपूर्ण हो गए.
वहीं, पश्चिमी देशों की सरकारों ने सू की सरकार को हटाने के लिए मिन आंग ह्लाइंग और उनके सहयोगी सैन्य अधिकारियों से दूरी बना ली. कई देशों ने उन पर प्रतिबंध भी लगाए हैं. इसके अलावा म्यांमार में विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ सेना की हिंसक कार्रवाई के बाद मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन के आरोप लगे, जिसके चलते देश में एक लंबा और खूनी गृहयुद्ध शुरू हो गया.
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पड़ोसियों से संबंध सुधारना चाहते हैं ह्लाइंग
यह दौरा मिन आंग ह्लाइंग के सबसे महत्वपूर्ण राजनयिक कार्यक्रमों में से एक है. इसी कड़ी में ह्लाइंग चीन, भारत और लाओस से भी रिश्ते सुधारना चाहते हैं. दूसरी तरफ राष्ट्रपति का पद संभालने के बाद से मिन आंग ह्लाइंग अप्रैल क्षेत्रीय संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. इन देशों की यात्राओं और रूस के साथ करीबी संबंधों के बावजूद वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी हद तक अलग-थलग पड़े हैं. इसी बीच वह अपनी छवि भी सुधारने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन म्यांमार में लोकतंत्र-समर्थक प्रतिरोध सेनानियों और अधिक स्वायत्तता की मांग करने वाले सशस्त्र जातीय अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ सेना की क्रूरताएं अभी भी जारी हैं. वहीं, क्रूरताओं का रिकॉर्ड रखने वाले असिस्टेंस एसोसिएशन फॉर पॉलिटिकल प्रिजनर्स के अनुसार, म्यांमार के सुरक्षा बलों द्वारा 8,200 से अधिक नागरिकों की हत्या की जा चुकी हैं और 31,645 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. ‘फोर्टिफाई राइट्स’ की वरिष्ठ मानवाधिकार विशेषज्ञ चिट सेंग ने पिछले महीने कहा था कि फर्जी चुनावों के बाद सैन्य वर्दी से राष्ट्रपति के लिबास में बदलने से सैन्य सरकार का मूल स्वरूप नहीं बदलता है. उन्होंने इसे एक क्रूर शासन बताया जो अपने ही लोगों की हत्या करता है और जिसे वैध नहीं ठहराया जाना चाहिए.

मिन आंग ह्लाइंग के खिलाफ लगाए नारे
बैंकॉक में संयुक्त राष्ट्र के क्षेत्रीय मुख्यालय के बाहर इस दौरे के विरोध में केवल एक दर्जन के करीब लोग ही जमा हुए. उन्होंने म्यांमार में प्रतिरोध बलों के समर्थन में और मिन आंग ह्लाइंग के पतन की कामना करते हुए नारे लगाए. आलोचकों को शांत करने के लिए सरकार ने इस हफ्ते ‘इंटरनेशनल कमिटी ऑफ द रेड क्रॉस’ (ICRC) के एक प्रतिनिधि को 81 साल की सू की से मिलने की इजाजत दी. सू को नजरबंद किए जाने के बाद से किसी बाहरी अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र मानवीय संगठन के साथ यह उनका पहला संपर्क था. ICRC ने इस मुलाकात की पुष्टि तो की, लेकिन उनकी सेहत या मुलाकात को लेकर हुई बातचीत के बारे में कोई जानकारी नहीं दी. सू की को 2022 के आखिर में 33 साल की जेल की सज़ा सुनाई गई थी. उनके समर्थकों और मानवाधिकार समूहों का कहना था कि ये आरोप झूठे थे और उनका मकसद उन्हें राजनीति में लौटने से रोकना था. 30 अप्रैल को उन्हें जेल से हटाकर नजरबंद कर दिया गया और उनकी सजा घटाकर 18 साल कर दी गई, जिसमें से 13 साल से ज्यादा की सजा अभी बाकी है. इसी बीच संयुक्त राष्ट्र, पश्चिमी देशों की सरकारों और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने बार-बार उनकी तुरंत रिहाई की मांग की है. मिन आंग ह्लाइंग का थाईलैंड दौरा पड़ोसी देशों की यात्राओं की एक बड़ी श्रृंखला का हिस्सा है, क्योंकि 70 साल के मिन आंग ह्लाइंग ‘एसोसिएशन ऑफ़ साउथईस्ट एशियन नेशंस’ (ASEAN) में अपनी साख फिर से बनाना चाहते हैं.
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आसियान की एकता के लिए जरूरी
2021 में सत्ता पर कब्जा करने के बाद उन्हें कई सालों तक कूटनीतिक अलगाव का सामना करना पड़ा है और तय शांति योजना का पालन न करने के कारण उन्हें ASEAN की उच्च-स्तरीय बैठकों में शामिल होने से रोक दिया गया था. बैंकॉक ने म्यांमार की मिलिट्री लीडरशिप के साथ करीबी रिश्ते बनाए रखे हैं और आसियान (ASEAN) के भीतर नेपीडॉ के साथ फिर से बातचीत शुरू करने का सबसे बड़ा समर्थक बनकर उभरा है. हालांकि यह दौरा आधिकारिक तौर पर द्विपक्षीय संबंधों से जुड़ा है, लेकिन मंगलवार को इंडोनेशिया के दौरे के दौरान अनुतिन ने कहा कि आसियान की एकता, क्षेत्रीय शांति और स्थिर म्यांमार के लिए जरूरी है. उन्होंने माना कि थाईलैंड ने सोच-समझकर फिर से बातचीत शुरू करने की वकालत की है. उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत जारी रखी जाए और ज़मीनी हकीकत को ध्यान में रखा जाए.
फोर्टिफाई राइट्स ने की आलोचना
दूसरी तरफ ‘फोर्टिफाई राइट्स’ की एक और मानवाधिकार विशेषज्ञ थानिदा पियाचोट ने इससे असहमति जताई. उन्होंने कहा कि मिन आंग ह्लाइंग को वैध नेता मानना और ‘युद्ध अपराधी के खून से सने हाथों से हाथ मिलाना’ उन आम नागरिकों के बीच गलत संदेश जाता है. उन्होंने थाईलैंड और आसियान से आग्रह किया कि वे ‘दूसरे के मामलों में दखल न देने’ की नीतियों की आड़ लेना बंद करें और म्यांमार में मानवाधिकारों को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाएं.

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दो महीने पहले आए थे भारत
बता दें कि 30 मई को म्यांमार के राष्ट्रपति यू मिन आंग ह्लाइंग ने भारत की यात्रा की थी. इसके बाद उन्होंने बिहार के गयाजी जिले में बौद्ध तीर्थ स्थल और यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल महाबोधि मंदिर में पूजा-अर्चना की. ह्लाइंग अपनी कैबिनेट के कई मंत्रियों और व्यापारिक नेताओं सहित एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत की अपनी पांच दिवसीय यात्रा के रूप में शनिवार सुबह गयाजी पधारे थे. यहां हवाई अड्डे पर बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और राज्य मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने उनका स्वागत किया और गार्ड ऑफ ऑनर दिया. एक अधिकारी ने कहा कि म्यांमार के राष्ट्रपति ने भगवान बुद्ध के जीवन से संबंधित चार पवित्र स्थलों में से एक महाबोधि मंदिर का दौरा किया और वहां प्रार्थना की.

सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों पर हुई थी चर्चा
सिन्हा ने कहा कि भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया की पवित्र भूमि पर आंग ह्लाइंग की यात्रा भारत और म्यांमार के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. राज्य के कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत और म्यांमार के बीच सहयोग, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, बौद्ध विरासत और आपसी विकास संबंध लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहे हैं. आंग ह्लाइंग की पांच दिवसीय भारत यात्रा व्यापार, कनेक्टिविटी, सीमा सुरक्षा और रक्षा में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने पर केंद्रित होगी. यह दौरा म्यांमार के संसदीय चुनावों के बाद राष्ट्रपति बनने के दो महीने से भी कम समय बाद हो रहा है.
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